भारत की शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। सरकार ने पारंपरिक बीएड कोर्स को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का फैसला लिया है। यह कदम नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य है कि भविष्य के शिक्षक आधुनिक, तकनीकी और व्यावहारिक रूप से दक्ष बन सकें। अब बीएड की जगह नया ITEP कोर्स और एक वर्षीय बीएड प्रोग्राम शुरू किया जाएगा।
बीएड कोर्स क्यों हुआ बंद
कई वर्षों से बीएड कोर्स शिक्षक बनने की अनिवार्य योग्यता थी, लेकिन इस कोर्स में ज्यादातर सैद्धांतिक ज्ञान पर जोर दिया जाता था और व्यावहारिक प्रशिक्षण की कमी थी। आज के समय में शिक्षा डिजिटल और तकनीकी रूप से विकसित हो चुकी है। इसलिए सरकार ने तय किया कि शिक्षकों को अब ऐसे कार्यक्रमों से प्रशिक्षित किया जाए जो वास्तविक शिक्षण वातावरण और तकनीक दोनों में निपुण बनाएं।
अब लागू होगा ITEP कोर्स
राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) ने घोषणा की है कि अब चार वर्षीय ITEP (Integrated Teacher Education Programme) को प्राथमिकता दी जाएगी। यह कोर्स 12वीं पास छात्रों के लिए होगा और इसमें प्रवेश राष्ट्रीय सामान्य प्रवेश परीक्षा (NCET) के माध्यम से मिलेगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे शिक्षकों को तैयार करना है जो शिक्षण मनोविज्ञान, मूल्य शिक्षा, डिजिटल लर्निंग और पेडागॉजी में दक्ष हों।
एक वर्षीय बीएड की वापसी
नई शिक्षा नीति के तहत 2026-27 सत्र से एक वर्षीय बीएड कोर्स दोबारा शुरू किया जाएगा। यह कोर्स केवल उन छात्रों के लिए होगा जिन्होंने पहले से BA B.Ed या B.Sc B.Ed जैसी इंटीग्रेटेड डिग्री प्राप्त की है। इससे छात्रों को शिक्षक बनने का मौका कम समय में मिलेगा।
शिक्षक बनने के लिए जरूरी परीक्षाएं
ITEP या एक वर्षीय बीएड कोर्स पूरा करने के बाद उम्मीदवारों को शिक्षक पात्रता परीक्षाएं देनी होंगी। इनमें राष्ट्रीय स्तर पर CTET (Central Teacher Eligibility Test) और राज्य स्तर पर TET (Teacher Eligibility Test) शामिल हैं। इन परीक्षाओं को पास करने के बाद ही उम्मीदवार सरकारी या निजी स्कूलों में आवेदन कर सकते हैं।
नई शिक्षा नीति का उद्देश्य
नई शिक्षा नीति 2020 का लक्ष्य शिक्षा को आधुनिक और उपयोगी बनाना है। अब शिक्षक सिर्फ ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि छात्रों के मार्गदर्शक और प्रेरक होंगे। उन्हें डिजिटल शिक्षा, शोध आधारित शिक्षण और आलोचनात्मक सोच जैसी नई क्षमताओं से सशक्त किया जाएगा।
निष्कर्ष
B.Ed कोर्स को समाप्त कर ITEP और एक वर्षीय बीएड कोर्स की शुरुआत भारतीय शिक्षा व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव है। इससे न केवल शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि स्कूल शिक्षा को भी नई दिशा मिलेगी। अब शिक्षक 21वीं सदी की शिक्षा प्रणाली के अनुरूप तैयार होंगे, जिससे विद्यार्थियों का भविष्य और भी उज्जवल बनेगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। बीएड और ITEP कोर्स से संबंधित ताज़ा अपडेट के लिए NCTE या संबंधित विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करें।
